Aug 03, 2026

उत्तराखंड: ओलंपिक मेजबानी का संकल्प लेकर कावड़ उठाएंगी मंत्री रेखा आर्या,  22 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा

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देहरादून। भारत को खेलों के महाकुंभ 'ओलंपिक 2036' की मेजबानी मिले और देश खेल के क्षेत्र में विश्वगुरु बने—इसी पावन और बड़े संकल्प के साथ उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या 10 अगस्त को एक अनोखी धार्मिक व खेल चेतना यात्रा पर निकलने जा रही हैं। खेल मंत्री हरिद्वार से ऋषिकेश तक 22 किलोमीटर लंबी पैदल कांवड़ यात्रा निकालेंगी।

उत्तराखंड की खेल मंत्री रेखा आर्या ने वर्ष 2036 ओलंपिक खेलों की मेजबानी भारत को दिलाने के संकल्प के साथ एक अनोखी पहल की घोषणा की है। खेल और आध्यात्म का संगम बनती इस विशेष कांवड़ यात्रा में मंत्री रेखा आर्या 10 अगस्त को हरिद्वार से ऋषिकेश तक करीब 22 किलोमीटर की पैदल यात्रा करेंगी। यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को खेल महाशक्ति बनाने के विजन को जन-जन तक पहुंचाना और ओलंपिक मेजबानी के लिए सामूहिक संकल्प लेना है। सोमवार को उत्तरांचल प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता में रेखा आर्या ने बताया कि यात्रा का शुभारंभ हरिद्वार की पवित्र हर की पौड़ी से होगा और ऋषिकेश स्थित वीरभद्र मंदिर में जलाभिषेक के साथ इसका समापन किया जाएगा। इस दौरान भगवान भोलेनाथ से भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी मिलने और देश को खेलों के क्षेत्र में विश्व अग्रणी बनाने की प्रार्थना की जाएगी। रेखा आर्या ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड सदैव राष्ट्रीय संकल्पों और सकारात्मक अभियानों की भूमि रही है। यह कांवड़ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि खेल, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का प्रतीक होगी। उनका मानना है कि देवभूमि से उठने वाला यह संदेश देशभर के युवाओं में खेलों के प्रति नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा। यात्रा में संत-समाज का भी विशेष सानिध्य रहेगा। श्री पंच दशनाम जूना अखाड़ा के संरक्षक एवं अंतरराष्ट्रीय महामंत्री महंत हरि गिरि महाराज तथा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी महाराज विभिन्न चरणों में शामिल होंगे। इसके अलावा प्रदेश और देश के खिलाड़ी, खेल प्रेमी, युवा और बड़ी संख्या में आम नागरिक भी इस यात्रा का हिस्सा बनेंगे। खेल मंत्री ने प्रदेश के खिलाड़ियों, युवाओं और आमजन से इस विशेष कांवड़ यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने का माध्यम नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण और युवा शक्ति को नई दिशा देने का साधन भी है। भारत लंबे समय से ओलंपिक खेलों की मेजबानी की इच्छा जता रहा है और वर्ष 2036 के लिए अपनी दावेदारी मजबूत करने की दिशा में प्रयास कर रहा है। ऐसे में उत्तराखंड से शुरू हो रही यह संकल्प यात्रा खेलों के प्रति जनभागीदारी बढ़ाने और राष्ट्रीय भावना को मजबूत करने का प्रयास मानी जा रही है। धार्मिक आस्था, खेल चेतना और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का यह अनूठा संगम अब उत्तराखंड से देशभर में नई ऊर्जा का संदेश देने को तैयार है।