टिहरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का टिहरी दौरा उस समय बेहद भावुक और यादगार बन गया जब वे सुरक्षा घेरा छोड़ सीधे जनता के बीच पैदल भ्रमण पर निकल पड़े। अपने पसंदीदा जननेता को अपने बीच पाकर स्थानीय लोगों, व्यापारियों और मातृशक्ति ने उनका बेहद आत्मीय और गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान ढोल-दमाऊ की थाप और फूलों की वर्षा के साथ क्षेत्र की 'देवतुल्य' जनता ने मुख्यमंत्री पर जमकर प्यार बरसाया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने टिहरी में पैदल भ्रमण के दौरान जनता से मिले अपार स्नेह, समर्थन और आशीर्वाद के लिए आभार जताया है। उन्होंने कहा कि लोगों के आत्मीय अभिवादन और अपनत्व ने उन्हें भावविभोर कर दिया। जनता का यही विश्वास और स्नेह उन्हें जनसेवा के संकल्प को और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की ऊर्जा देता है। मुख्यमंत्री ने टिहरी भ्रमण के अनुभव साझा करते हुए कहा कि देवतुल्य जनता से मिला स्नेह उनके लिए बेहद भावुक करने वाला रहा। पैदल भ्रमण के दौरान लोगों ने जिस आत्मीयता के साथ उनका अभिवादन किया, उससे उन्हें जनता के साथ अपने जुड़ाव का एहसास हुआ। मुख्यमंत्री ने इस अपनत्व को अपने लिए विशेष प्रेरणा बताते हुए लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जनता का विश्वास किसी भी जनप्रतिनिधि के लिए बड़ी जिम्मेदारी होता है। लोगों का स्नेह और समर्थन उन्हें निरंतर जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। मुख्यमंत्री के अनुसार, जनता से सीधे संवाद और उनके बीच पहुंचने से मिलने वाला अपनत्व जनसेवा के संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करता है। टिहरी में पैदल भ्रमण के दौरान मिले समर्थन को मुख्यमंत्री ने अपने लिए महत्वपूर्ण अनुभव बताया। उनका कहना है कि जनता का विश्वास ही उन्हें प्रदेश के विकास और लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप कार्य करने की प्रेरणा देता है। लोगों का आत्मीय व्यवहार इस बात का एहसास कराता है कि जनप्रतिनिधियों और जनता के बीच संवाद तथा विश्वास का रिश्ता कितना महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने जनता के अभिवादन और अपनत्व को अपनी ताकत बताते हुए कहा कि यह स्नेह उन्हें जनसेवा के संकल्प पर लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उनके संदेश में जनता के प्रति आभार और लोगों के विश्वास को बनाए रखने का भाव प्रमुखता से सामने आया। टिहरी में जनता से मिले इस आत्मीय स्वागत के बाद मुख्यमंत्री ने लोगों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता का स्नेह और विश्वास उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि जनसेवा के दायित्व को पूरी निष्ठा से निभाने की प्रेरणा भी है।