नई दिल्ली। देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के रुझानों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर को बदलने के संकेत दे दिए हैं। पश्चिम बंगाल से लेकर तमिलनाडु, असम और केरल तक कई बड़े राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल रहे हैं। रुझानों में भारतीय जनता पार्टी जहां कई राज्यों में मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, वहीं कुछ पारंपरिक दलों को अप्रत्याशित झटके लगे हैं। पश्चिम बंगाल में इस बार भाजपा ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए 198 सीटों पर बढ़त बना ली है, जो राज्य की राजनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस 89 सीटों पर सिमटती नजर आ रही है। बंगाल में यह सिर्फ चुनावी नतीजा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और सूक्ष्म रणनीति का परिणाम बताया जा रहा है। संगठन के स्तर पर सुनील बंसल, भूपेंद्र यादव और बिप्लब कुमार देब की टीम ने बूथ स्तर तक मजबूत पकड़ बनाकर इस जीत की नींव रखी।
तमिलनाडु में भी इस बार सियासी तस्वीर पूरी तरह बदली नजर आ रही है। सत्ता विरोधी लहर इतनी मजबूत रही कि मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन अपनी कुलाथूर सीट तक नहीं बचा पाए। उन्हें अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी के उम्मीदवार ने शिकस्त दी। विजय की पार्टी 103 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि डीएमके गठबंधन 74 सीटों और एआईएडीएमके के नेतृत्व वाला एनडीए 54 सीटों पर पीछे चल रहा है। यह परिणाम राज्य की पारंपरिक ‘द्रविड़ राजनीति’ में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
असम में भाजपा एक बार फिर प्रचंड बहुमत की ओर बढ़ती दिख रही है। 126 सदस्यीय विधानसभा में पार्टी 99 सीटों पर आगे चल रही है, जो दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से काफी अधिक है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 23 सीटों पर सिमटा हुआ है। वहीं कांग्रेस के प्रमुख नेता गौरव गोगोई को जोरहाट सीट पर भाजपा उम्मीदवार से करीब 23 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा है।
केरल में कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है और 98 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वाम मोर्चा (एलडीएफ) 37 सीटों पर आगे है, जबकि भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए केवल 2 सीटों पर सिमटा हुआ है। अन्य उम्मीदवार 3 सीटों पर बढ़त बनाए हुए हैं।
इन रुझानों के साथ ही भाजपा शासित राज्यों की संख्या में भी इजाफा होता दिखाई दे रहा है। क्षेत्रफल के लिहाज से देखें तो देश के लगभग 72 प्रतिशत हिस्से पर भाजपा या उसके सहयोगी दलों की सरकार बनने की स्थिति बनती दिख रही है, जहां करीब 78 प्रतिशत आबादी निवास करती है।
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