Mar 04, 2026

जेल का रंग, जेल की होली: सुद्धोवाला जेल में कैदियों ने खुद बनाए हर्बल गुलाल से मनाया उत्सव, नाच-गाने के साथ जश्न

post-img

wजेल प्रशासन के अनुसार होली के मद्देनजर कैदियों को अरारोट और विभिन्न प्राकृतिक रंगों के मिश्रण से हर्बल गुलाल तैयार करना सिखाया गया। प्रशिक्षण के बाद कैदियों ने जेल परिसर के भीतर ही बड़ी मात्रा में रंग तैयार किया है। इन रंगों का उपयोग अब जेल में आयोजित होली उत्सव में किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि हर्बल रंग न केवल त्वचा के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।

होली जैसे प्रमुख त्योहार पर कैदियों को घर की कमी महसूस न हो, इसके लिए जेल प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए हैं। बुधवार को कैदियों के लिए विशेष भोज का आयोजन किया जाएगा। भोजन में गुजिया, पूड़ी, सब्जी, हलवा और खीर सहित कई पारंपरिक व्यंजन परोसे जाएंगे। कोशिश यह है कि त्योहार का माहौल बिल्कुल घर जैसा बने और कैदी उत्सव की खुशी महसूस कर सकें। सिर्फ स्वाद ही नहीं, इस बार होली का रंग संगीत और नृत्य से भी सराबोर रहेगा। जेल परिसर में नाच-गाने का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। जो कैदी नृत्य और गायन के शौकीन हैं, उनके लिए प्रतियोगिता भी रखी गई है। बेहतर प्रस्तुति देने वाले कैदियों को पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कार राशि उनके नाम से जेल में खोले गए बैंक खातों में जमा की जाएगी। इससे एक ओर जहां प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलेगा, वहीं कैदियों में सकारात्मक सोच भी विकसित होगी।

होली के अवसर पर कैदियों को अपने परिजनों से बात करने की विशेष छूट भी दी गई है। आमतौर पर त्योहारों के दौरान कैदी अपने परिवार को काफी याद करते हैं, जिससे उनमें मायूसी आ जाती है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने फोन पर बातचीत की व्यवस्था की है, ताकि वे अपने घर का हाल-चाल जान सकें और मानसिक रूप से मजबूत रह सकें। होली के जश्न के दौरान जेल के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहेंगे और कैदियों के साथ रंग खेलकर उत्सव में सहभागिता निभाएंगे। सुद्धोवाला जेल के कैदियों द्वारा तैयार किए गए हर्बल रंगों की गुणवत्ता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि हाल ही में लोक भवन में आयोजित वसंत उत्सव में इन रंगों की बिक्री भी की गई थी। वहां कैदियों ने स्टॉल लगाकर अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और बिक्री की। अधिकारियों के मुताबिक वसंत उत्सव के दौरान कैदियों ने 1.19 लाख रुपये की बिक्री की, जिसमें उनके बनाए हर्बल रंगों को खास सराहना मिली। इससे कैदियों का आत्मविश्वास भी बढ़ा है और उन्हें यह एहसास हुआ है कि वे समाज के लिए उपयोगी उत्पाद तैयार कर सकते हैं। जेल प्रशासन का मानना है कि ऐसे आयोजनों से कैदियों के कौशल विकास के साथ-साथ उनके पुनर्वास की दिशा में भी सकारात्मक कदम बढ़ता है। नियमित रूप से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से कैदियों को आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। डीआईजी जेल दधिराम मौर्या ने बताया कि इस बार कैदियों के बनाए गए हर्बल रंगों से ही होली खेली जाएगी। उन्होंने कहा कि उद्देश्य यही है कि कैदियों को त्योहार पर अकेलापन महसूस न हो और वे सकारात्मक माहौल में उत्सव मना सकें। प्रशासन की पहल से इस बार सुद्धोवाला जेल में होली सिर्फ रंगों का नहीं, बल्कि उम्मीद, हुनर और नई शुरुआत का भी उत्सव बनेगी।