Sep 17, 2026

डिजिटल होगी देश की तस्वीर: उत्तराखंड में जनगणना 2027 की तैयारियां तेज, 16 नवंबर से मिलेगी स्वगणना की सुविधा

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देहरादून। देश की जनसांख्यिकी का सटीक आंकड़ा जुटाने के महाअभियान 'जनगणना-2027' के दूसरे चरण को निष्पक्ष, सुगम और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। देहरादून नगर निगम सभागार में आयोजित दो दिवसीय गहन प्रशिक्षण शिविर का बुधवार को सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस प्रशिक्षण में 23 चार्ज अधिकारियों, 23 सहायक चार्ज अधिकारियों सहित तकनीकी सहायकों और संबंधित कार्मिकों ने भाग लिया, जिन्हें जनगणना की नई डिजिटल प्रक्रियाओं एवं तकनीकी पहलुओं से बारीकी से रूबरू कराया गया।

जनगणना-2027 के दूसरे चरण की तैयारियों को लेकर उत्तराखंड में प्रशासनिक कवायद तेज हो गई है। देहरादून नगर निगम सभागार में चार्ज अधिकारियों, सहायक चार्ज अधिकारियों और संबंधित कार्मिकों का दो दिवसीय प्रशिक्षण बुधवार को पूरा हुआ। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को जनगणना की प्रक्रिया, तकनीकी पहलुओं और कार्य को समयबद्ध एवं त्रुटिरहित तरीके से पूरा करने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी एवं जिला जनगणना अधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि इस बार जनगणना में तकनीक का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। जनगणना के दौरान लोगों से करीब 40 प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनके आधार पर आवश्यक आंकड़े जुटाए जाएंगे। प्रशासन के मुताबिक जनगणना के दूसरे चरण में एक दिसंबर 2026 से चार जनवरी 2027 तक जनसंख्या गणना की जाएगी। इससे पहले नागरिकों को अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। 16 नवंबर से 30 नवंबर 2026 तक स्वगणना का विकल्प रहेगा। प्रशासन ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अधिक से अधिक लोगों को स्वगणना की सुविधा के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि जनगणना की प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाया जा सके। प्रशिक्षण कार्यक्रम में 23 चार्ज अधिकारी, 23 सहायक चार्ज अधिकारी, तकनीकी सहायक और अन्य संबंधित कार्मिक शामिल हुए। प्रशिक्षण के दौरान अधिकारियों को जनगणना की विभिन्न प्रक्रियाओं के साथ तकनीकी व्यवस्था की जानकारी दी गई। साथ ही गणना के दौरान सामने आने वाली संभावित परिस्थितियों और उनके समाधान को लेकर भी आवश्यक जानकारी साझा की गई। जनगणना का दूसरा चरण प्रशासन के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी दौरान वास्तविक जनसंख्या गणना का कार्य किया जाएगा। स्वगणना की सुविधा से नागरिक अपनी जानकारी निर्धारित प्रक्रिया के तहत स्वयं उपलब्ध करा सकेंगे। इसके लिए जागरूकता अभियान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का लक्ष्य है कि जनगणना का कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा होने के साथ आंकड़े भी अधिकतम सटीक रहें। इसके लिए प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इस बार जनगणना की प्रक्रिया में डिजिटल व्यवस्था को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। प्रशिक्षण पूरा होने के साथ ही अब अधिकारियों के सामने स्वगणना और इसके बाद घर-घर जनसंख्या गणना की तैयारियों को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी है।