Aug 12, 2026

रूस में 97 दिनों तक फंसे पिथौरागढ़ के दो भाई सुरक्षित वतन लौटे: सीएम धामी के हस्तक्षेप से बनी बात,फोन पर जाना हाल-चाल

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देहरादून। रोजगार के नाम पर ठगी का शिकार होकर रूस में पिछले 97 दिनों से नारकीय जीवन जीने को मजबूर पिथौरागढ़ के दो सगे भाई आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के व्यक्तिगत हस्तक्षेप, त्वरित कार्रवाई और विदेश मंत्रालय के साथ बेहतर समन्वय की बदौलत यह संभव हो सका।

रूस में करीब 97 दिनों से फंसे पिथौरागढ़ के दो भाइयों की आखिरकार सुरक्षित भारत वापसी हो गई। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के हस्तक्षेप और अधिकारियों के लगातार प्रयासों के बाद आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की सकुशल अपने घर पहुंच गए। दोनों की वापसी के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। मुख्यमंत्री धामी ने फोन पर दोनों भाइयों से बातचीत कर उनकी कुशलक्षेम जानी और रूस में बिताए दिनों के घटनाक्रम की जानकारी ली। लंबे इंतजार के बाद दोनों बेटों को सुरक्षित देखकर परिजनों ने राहत की सांस ली। परिवार ने मुख्यमंत्री के संवेदनशील हस्तक्षेप और त्वरित प्रयासों के लिए उनका आभार जताया। परिजनों के अनुसार, दोनों भाइयों को सितारगंज स्थित एक ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से विदेश में बेहतर रोजगार दिलाने का भरोसा दिया गया था। परिवार का आरोप है कि रोजगार के नाम पर उनसे करीब आठ लाख रुपये लिए गए और इसके बाद दोनों को रूस भेज दिया गया। दोनों भाई 5 मई 2026 को भारत से रवाना हुए और अगले दिन मॉस्को पहुंचे। परिवार के मुताबिक, रूस पहुंचने के बाद उन्हें उस काम में नहीं लगाया गया, जिसके लिए उन्हें भेजा गया था। इसके बजाय उनकी इच्छा के विपरीत दूसरे कार्य कराए गए। आरोप है कि इसके लिए उन्हें पारिश्रमिक भी नहीं दिया गया। परिजनों का यह भी कहना है कि दोनों युवकों को स्वतंत्र रूप से आने-जाने की अनुमति नहीं थी। काम करने से इनकार करने पर उन्हें कथित तौर पर धमकाया जाता था। लंबे समय तक दोनों से नियमित संपर्क नहीं होने के कारण परिवार की चिंता लगातार बढ़ती गई। परिवार के मुताबिक, अंतिम संपर्क के दौरान दोनों भाइयों ने उस परिसर के आसपास ड्रोन या मिसाइल हमले होने की जानकारी भी दी थी, जहां उन्हें रखा गया था। इसके बाद परिजनों को उनकी सुरक्षा को लेकर और अधिक चिंता सताने लगी। परिवार ने मामले को मुख्यमंत्री के संज्ञान में पहुंचाया और दोनों की सुरक्षित वापसी की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री धामी ने संबंधित अधिकारियों को दोनों युवकों की सुरक्षित और जल्द वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके बाद राज्य सरकार के अधिकारियों ने विदेश मंत्रालय और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ लगातार संपर्क और समन्वय स्थापित किया। लगातार प्रयासों के बाद दोनों भाइयों की भारत वापसी सुनिश्चित हो सकी। करीब 97 दिनों के लंबे इंतजार के बाद दोनों भाई अपने घर पहुंचे तो परिवार की आंखों में खुशी और राहत के आंसू छलक पड़े। मुख्यमंत्री धामी ने दोनों से फोन पर बातचीत कर उनकी स्थिति जानी और भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार अपने नागरिकों की सुरक्षा और हितों को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने अधिकारियों को विदेशों में संकट में फंसे राज्य के नागरिकों की सहायता के लिए आवश्यक समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। दोनों भाइयों की वापसी ने परिवार को बड़ी राहत दी है। हालांकि, रोजगार के नाम पर विदेश भेजे जाने और वहां कथित तौर पर प्रतिकूल परिस्थितियों में रखे जाने के आरोपों ने विदेश रोजगार के नाम पर होने वाली धोखाधड़ी और युवाओं की सुरक्षा से जुड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं।