Oct 30, 2026
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दीपावली से ठीक पहले थमे उत्तराखंड रोडवेज के पहिए: 3 महीने से बिना वेतन काम कर रहे कर्मचारियों का अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार

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देहरादून। दीपावली और आगामी त्योहारों के मुहाने पर खड़े उत्तराखंड में आम जनता के लिए सफर करना बेहद दुश्वार हो गया है। तीन महीने से बकाया वेतन न मिलने, समान कार्य के बदले समान वेतन की अनदेखी और घाटे में डूबते परिवहन निगम को उबारने जैसी मूलभूत मांगों को लेकर उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन ने 30 अक्टूबर से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।

दीपावली के त्योहार से ठीक पहले उत्तराखंड में रोडवेज बसों का संचालन लड़खड़ा गया है। तीन महीने से वेतन नहीं मिलने और लंबित मांगों के समाधान में देरी से नाराज उत्तराखंड परिवहन निगम के कर्मचारियों ने 30 अक्टूबर से प्रदेशभर में अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के आह्वान पर प्रदेश के 20 डिपो में चालक, परिचालक और अन्य कर्मचारी धरने पर बैठ गए हैं। आंदोलन का सीधा असर बस सेवाओं पर पड़ा है। लंबी दूरी की सैकड़ों बसें डिपो में खड़ी हैं और यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है। देहरादून के आईएसबीटी पर सुबह से ही आंदोलन का असर दिखाई दिया। बसों के इंतजार में यात्री परेशान होते रहे, लेकिन कई मार्गों पर उन्हें निर्धारित बस सेवा नहीं मिल सकी। हरियाणा और पंजाब जाने वाले यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। मजबूरी में कुछ यात्रियों को निजी वाहनों से सफर करना पड़ा, जहां उनसे अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतें भी सामने आईं। आईएसबीटी पर हरियाणा जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे अरुण ने बताया कि वह पिछले दो घंटे से बस की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन कोई बस उपलब्ध नहीं हो रही। पंजाब जाने वाले ओम शर्मा ने कहा कि वह तीन घंटे से इंतजार कर रहे हैं। बसें खड़ी हैं, लेकिन उनमें चालक-परिचालक नहीं होने के कारण संचालन नहीं हो रहा। बाद में उन्हें हड़ताल की जानकारी मिली। उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के महामंत्री अशोक चौधरी के अनुसार कर्मचारियों को अगस्त, सितंबर और अक्टूबर का वेतन नहीं मिला है। निगम की वित्तीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उनका आरोप है कि लंबे समय से नई बसों की खरीद नहीं होने और निगम के अधिकृत मार्गों पर निजी बस संचालकों को परमिट दिए जाने से रोडवेज की आय प्रभावित हुई है। चौधरी ने बताया कि वर्ष 2022 के बाद निगम की सालाना आय में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई है। पहले प्रतिदिन लगभग दो करोड़ रुपये की आय होती थी, जो अब घटकर डेढ़ करोड़ रुपये तक रह गई है। कर्मचारियों का कहना है कि आय में गिरावट के बावजूद निगम की व्यवस्थाओं में सुधार और बस बेड़े के विस्तार की दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में तीन महीने का बकाया वेतन तत्काल जारी करना और प्रत्येक माह की सात तारीख तक वेतन भुगतान सुनिश्चित करना शामिल है। संविदा, विशेष श्रेणी, एजेंसी और ठेका कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन देने की मांग भी उठाई गई है। यूनियन नियमित होने तक इन कर्मचारियों को 30,447 रुपये प्रतिमाह देने की मांग कर रही है। इसके अलावा हिमाचल रोडवेज की तर्ज पर राजकीय कोष से वेतन भुगतान, नियमित कर्मचारियों को 60 प्रतिशत महंगाई भत्ता, संविदा और विशेष श्रेणी के कर्मचारियों को एरियर सहित महंगाई भत्ता देने की मांग की गई है। यूनियन एजेंसी व्यवस्था समाप्त कर एजेंसी के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों को निगम कर्मचारी घोषित करने, अवैध निजी बस संचालन पर रोक लगाने, डग्गामारी के खिलाफ कार्रवाई और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाया भुगतान के निस्तारण की मांग भी कर रही है। यूनियन के अनुसार 23 अक्टूबर को एक दिवसीय आंदोलन के बाद 29 अक्टूबर को परिवहन निगम के अधिकारियों के साथ करीब पांच घंटे तक वार्ता हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। इसी के बाद अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया। यूनियन का दावा है कि निगम में कार्यरत करीब 3,500 संविदा कर्मचारियों को समान काम के बदले समान वेतन नहीं मिल रहा है, जबकि इस संबंध में उच्च न्यायालय के आदेश भी हो चुके हैं। प्रदेश में प्रतिदिन करीब एक हजार बसों का संचालन होता है। आंदोलन के चलते 500 से 600 बसों के पहिए थमने से निगम का लगभग 50 प्रतिशत काम प्रभावित बताया जा रहा है। फिलहाल पर्वतीय मार्गों पर संचालित बसों को आंदोलन से दूर रखा गया है। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द समाधान नहीं हुआ तो अगले दो दिनों में परिवहन निगम का काम पूरी तरह ठप हो सकता है। त्योहार के समय बस सेवाओं में आई इस बाधा ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें सरकार और परिवहन निगम प्रबंधन पर हैं कि वेतन और अन्य मांगों को लेकर जारी गतिरोध कब समाप्त होता है और दीपावली से पहले यात्रियों को राहत मिल पाती है या नहीं।