देहरादून। उत्तराखंड के छात्र-छात्राओं के लिए शिक्षा का परिदृश्य अब तेजी से बदलने जा रहा है। पारंपरिक ब्लैकबोर्ड और किताबों के दायरे से निकलकर राज्य के 18 लाख से अधिक विद्यार्थी अब आधुनिक तकनीक और डिजिटल लर्निंग के जरिए ज्ञान अर्जित करेंगे। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए धामी सरकार ने हाल ही में पेश किए गए अनुपूरक बजट में 200 करोड़ रुपये की बड़ी राशि का प्रावधान किया है। सरकार के इस कदम से पर्वतीय और दूरदराज के क्षेत्रों में स्थित सरकारी विद्यालयों से लेकर विश्वविद्यालयों तक के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शैक्षणिक संसाधन सुलभ होंगे।
शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में धामी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के करीब 18.6 लाख विद्यार्थियों को डिजिटल शिक्षा का लाभ पहुंचाने के लिए सरकार ने 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस पहल के तहत प्राथमिक विद्यालयों से लेकर माध्यमिक विद्यालयों, इंटर कॉलेजों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों तक पढ़ाई के नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया जाएगा। सरकार की मंशा है कि पारंपरिक कक्षा शिक्षण के साथ डिजिटल माध्यमों को जोड़कर विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन सामग्री और आधुनिक शैक्षिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। डिजिटल शिक्षा के विस्तार से खास तौर पर उन विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है, जिन्हें भौगोलिक परिस्थितियों या संसाधनों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री तक पहुंचने में कठिनाई होती है। ऑनलाइन और डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध होने पर विद्यार्थी अपनी सुविधा के अनुसार विषयों का अध्ययन कर सकेंगे। इसके साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी उन्हें सहायता मिल सकती है। उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करना हमेशा से चुनौती रहा है। कई दूरस्थ क्षेत्रों में विद्यार्थियों को अतिरिक्त अध्ययन सामग्री, विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के पर्याप्त साधन नहीं मिल पाते। डिजिटल शिक्षा के विस्तार से इन कमियों को दूर करने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार ने सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों को भी डिजिटल शिक्षा के दायरे में लाने पर जोर दिया है, जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के अनुसार, राज्य के विद्यालयों में पहले से ही स्मार्ट कक्षाओं और आभासी माध्यमों से आधुनिक पढ़ाई की व्यवस्था की जा रही है। अब इस पहल को और व्यापक बनाकर स्कूल शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ाया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को बदलती शैक्षिक जरूरतों के अनुरूप सीखने के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास होगा। उत्तराखंड की डिजिटल शिक्षा संबंधी पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से विकसित ‘बिल्डिंग फ्यूचर-रेडी टीचर थ्रू एआई’ परियोजना को यूनेस्को के ‘एआई फॉर एजुकेशन अवार्ड-2026’ के शिक्षक प्रशिक्षण वर्ग में दुनिया की शीर्ष छह परियोजनाओं में स्थान मिला है। इसकी घोषणा स्विट्जरलैंड के जिनेवा में आयोजित ‘एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट-2026’ में की गई। यह उपलब्धि राज्य में शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग की संभावनाओं को रेखांकित करती है। हालांकि, डिजिटल शिक्षा की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विद्यालयों और महाविद्यालयों में जरूरी उपकरण, इंटरनेट सुविधा, प्रशिक्षित शिक्षक और नियमित तकनीकी सहायता कितनी प्रभावी ढंग से उपलब्ध कराई जाती है। 200 करोड़ रुपये के प्रावधान से सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी विस्तार की दिशा तय की है। अब चुनौती इस बजट को धरातल पर उतारने और यह सुनिश्चित करने की होगी कि डिजिटल शिक्षा का लाभ केवल शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि पर्वतीय और दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों तक भी समान रूप से पहुंचे।