Apr 28, 2026

अल्मोड़ा: श्मशान घाट पर शादी के नाम पर अश्लीलता का आरोप, स्थानीय समाज ने जताई कड़ी नाराजगी

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अल्मोड़ा। उत्तराखंड की शांत वादियों और पवित्र नदियों के संगम को अब 'डेस्टिनेशन वेडिंग' के नाम पर विवादों में घसीटा जा रहा है। ताजा मामला अल्मोड़ा जिले के सल्ट ब्लॉक स्थित मरचूला क्षेत्र का है, जहाँ आस्था और परंपराओं को ताक पर रखकर कुछ पर्यटकों ने श्मशान घाट को ही शादी का मंडप बना दिया। रामगंगा और बदनगढ़ नदी के संगम पर स्थित श्मशान घाट पर हुई इस शादी का वीडियो वायरल होते ही स्थानीय लोगों और तीर्थ पुरोहितों में भारी आक्रोश है। कॉर्बेट नेशनल पार्क से सटे मरचूला क्षेत्र में रामगंगा और बदनगढ़ नदी का संगम होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संगम स्थल अत्यंत पवित्र होते हैं, जहाँ सालों से आस-पास के गांवों के लोग अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करते आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पास के ही एक निजी रिसॉर्ट में ठहरे पर्यटकों को यह लोकेशन इतनी पसंद आई कि उन्होंने यहाँ 'डेस्टिनेशन वेडिंग' करने की ठान ली। हैरानी की बात यह है कि जिस प्रतीक्षालय और घाट पर लोग शोक व्यक्त करते हैं, वहाँ फूलों और लाइटों से भव्य सजावट की गई और रविवार को ढोल-नगाड़ों के साथ जयमाला की रस्म निभाई गई। इस पूरे प्रकरण में रिसॉर्ट प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, रिसॉर्ट प्रबंधक राकेश शर्मा का दावा है कि उन्होंने पर्यटकों को पहले ही आगाह किया था कि यह एक सक्रिय श्मशान घाट है, लेकिन पर्यटकों ने लोकेशन की खूबसूरती के मोह में इस चेतावनी को अनसुना कर दिया। स्थानीय लोगों का आरोप है कि व्यावसायिक लाभ के लिए रिसॉर्ट संचालकों ने मर्यादाओं की अनदेखी होने दी।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते ही क्षेत्र के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत सहित कई स्थानीय निवासियों ने सख्त आपत्ति जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि हिंदू संस्कृति में श्मशान घाट पर मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। स्थानीय लोगों ने इसे 'पर्यटन के नाम पर अश्लीलता और सांस्कृतिक असंवेदनशीलता' करार दिया है। उनका तर्क है कि नदियों के प्रतिबंधित क्षेत्र और श्मशान जैसे संवेदनशील स्थानों पर ऐसे आयोजनों से देवभूमि की छवि खराब हो रही है। वही मामला गरमाता देख प्रशासन ने भी अब रुख कड़ा कर लिया है। सल्ट के तहसीलदार आबिद अली ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थलों और विशेषकर शवदाह गृहों पर बिना अनुमति के कोई भी समारोह आयोजित करना कानूनी रूप से गलत है। हालांकि अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच की जाएगी और नियमों के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। एक तरफ उत्तराखंड सरकार प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'वेडिंग डेस्टिनेशन हब' बनाने के लिए प्रयासरत है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं सरकार के प्रयासों पर पानी फेर रही हैं। जानकारों का मानना है कि यदि पर्यटकों को स्थानीय रीति-रिवाजों और पवित्र स्थलों की मर्यादा का ज्ञान नहीं कराया गया, तो पर्यटन और परंपरा के बीच का यह टकराव भविष्य में और बढ़ सकता है। फिलहाल, मरचूला की इस 'श्मशान वाली शादी' ने पूरे राज्य में एक नई बहस छेड़ दी है कि आखिर पर्यटन की सीमा कहाँ खत्म होती है और आस्था की कहाँ से शुरू।