हल्द्वानी। उत्तराखंड में वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी तैयारियां तेज होने के बीच भाजपा की दो दिवसीय प्रदेश कार्यसमिति की बैठक बुधवार को हल्द्वानी में शुरू हो गई है। बैठक को महज संगठनात्मक औपचारिकता के बजाय आगामी विधानसभा चुनाव की रणनीति तैयार करने के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बैठक में प्रदेश संगठन से लेकर सरकार के कामकाज, बूथ स्तर की स्थिति और विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ को लेकर व्यापक मंथन होने की संभावना है। बैठक की शुरुआत से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम, पूर्व मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत समेत सरकार के मंत्रियों, प्रदेश पदाधिकारियों, सभी जिलों के अध्यक्ष-महामंत्री और विभिन्न मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारियों ने ध्वजारोहण किया। इसके बाद कार्यसमिति की बैठक को लेकर पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों का हल्द्वानी पहुंचना जारी रहा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी बैठक में शामिल होंगे। उनके दौरे को देखते हुए पार्टी संगठन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी में प्रदेश संगठन के कामकाज और आगामी चुनावी रणनीति पर महत्वपूर्ण चर्चा होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बुधवार दोपहर करीब 2:20 बजे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के स्वागत के लिए पंतनगर एयरपोर्ट जाएंगे। इसके बाद दोपहर 3:10 बजे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में शामिल होंगे। इसके बाद शाम पांच बजे प्रदेश पदाधिकारियों की बैठक प्रस्तावित है, जबकि शाम सात बजे कोर कमेटी की बैठक में मुख्यमंत्री समेत पार्टी के वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। ये सभी बैठकें हल्द्वानी में आयोजित होंगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी के कारण प्रदेश कार्यसमिति को संगठन के लिहाज से खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पार्टी के प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री, मोर्चा-प्रकोष्ठों के पदाधिकारी और अन्य वरिष्ठ नेता बैठक में संगठन की मौजूदा स्थिति को लेकर अपनी रिपोर्ट और फीडबैक रखेंगे।
2027 की हैट्रिक के लिए अभी से चुनावी तैयारी
उत्तराखंड में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने की कोशिश में जुटी भाजपा के लिए 2027 का विधानसभा चुनाव प्रतिष्ठा का चुनाव होगा। पार्टी नेतृत्व चुनाव से काफी पहले संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और सरकार के कामकाज का फीडबैक लेने की रणनीति पर काम कर रहा है। हल्द्वानी में होने वाली कार्यसमिति इसी रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। पार्टी के सामने जहां सरकार की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने की चुनौती है, वहीं संगठन के भीतर समन्वय, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदा विधायकों की स्थिति को भी परखा जाना है। बैठक में यह आकलन किया जा सकता है कि पार्टी की सरकार की योजनाओं का लाभ जमीन तक कितना पहुंचा है और उसका राजनीतिक असर क्या रहा है।
मंत्रियों और विधायकों का भी बनेगा रिपोर्ट कार्ड?
कार्यसमिति की बैठक को मौजूदा मंत्रियों और विधायकों के लिए भी अहम माना जा रहा है। पार्टी संगठन विधानसभा क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, जनता के साथ संवाद, कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और स्थानीय स्तर पर उनकी छवि को लेकर फीडबैक जुटाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी की नजर सिर्फ चुनावी सर्वे पर नहीं, बल्कि संगठन की जमीनी रिपोर्ट पर भी रहेगी। किसी विधानसभा क्षेत्र में विधायक कितना सक्रिय है, जनता और कार्यकर्ताओं के बीच उसकी पहुंच कैसी है, स्थानीय संगठन उसके साथ किस तरह काम कर रहा है और बूथ स्तर पर पार्टी की स्थिति कितनी मजबूत है—इन सभी पहलुओं को समीक्षा में शामिल किया जा सकता है। ऐसे में कार्यसमिति को 2027 के संभावित टिकटों की शुरुआती राजनीतिक जमीन तैयार करने वाली बैठक के तौर पर भी देखा जा रहा है।