Oct 29, 2026
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गैरसैंण से सीएम धामी का विपक्ष पर करारा प्रहार: कांग्रेस के पाप धो रही हमारी सरकार, देवभूमि में सफाई अभियान रहेगा जारी

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गैरसैंण। उत्तराखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र के समापन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विपक्ष पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। गैरसैंण (भराड़ीसैंण) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान सरकार पिछले पांच वर्षों से केवल जनहित के काम ही नहीं कर रही, बल्कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकारों द्वारा किए गए 'पापों को धोने' का काम भी कर रही है। उन्होंने साफ किया कि राज्य के हित में शुरू किया गया यह सफाई अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।

उत्तराखंड विधानसभा के गैरसैंण सत्र के समापन के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार पिछले वर्षों में कांग्रेस की सरकारों से विरासत में मिली समस्याओं को दूर करने का काम कर रही है और यह प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष के रवैये को अराजक बताते हुए भ्रष्टाचार, समान नागरिक संहिता, मदरसा व्यवस्था, भू-कानून और राज्य आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर अपनी सरकार का पक्ष रखा। उनके बयान से साफ है कि आगामी राजनीतिक मुकाबले से पहले भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज होने की संभावना है।पत्रकारों से बातचीत में धामी ने कहा कि गैरसैंण में इस वर्ष विधानसभा के दो सत्र आयोजित किए गए और पिछले पांच वर्षों में यहां सबसे अधिक समय तक सदन की कार्यवाही चली। उन्होंने मौजूदा विधानसभा के इस सत्र को सरकार के कार्यकाल का अंतिम सत्र बताया। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस का व्यवहार जनहित के मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय हंगामा करने वाला रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व की गतिविधियों और प्रधानमंत्री से जुड़े बयानों को लेकर भी आलोचना की। मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा कांड का जिक्र करते हुए इसे प्रदेश के इतिहास का काला दिन बताया। उन्होंने कहा कि राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों के जख्मों को कुरेदने वाले बयानों से उत्तराखंड की जनता की भावनाएं आहत होती हैं। धामी ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव की उत्तराखंड के लोगों को लेकर कथित टिप्पणियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से जुड़े मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक भविष्य को लेकर विश्वास जताते हुए कहा कि वर्ष 2029 में भाजपा और बड़े बहुमत के साथ सत्ता में आएगी। ये टिप्पणियां मुख्यमंत्री की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा थीं। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर धामी ने कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि उनकी सरकार में कोई घोटाला नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस झूठ फैलाकर सरकार को घेरने की कोशिश करती है। मंत्री रेखा आर्या से जुड़े विवाद का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक साथ रहने के दौरान कोई गड़बड़ी सामने नहीं आई और विवाद तब उभरा, जब मंत्री ने अपने पति की कथित गलत बातों को मानने से इनकार किया। यह मुख्यमंत्री का पक्ष है; विवाद से जुड़े आरोपों और तथ्यों का निर्धारण संबंधित जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने सख्त भू-कानून लागू किया है। उन्होंने मदरसा बोर्ड की जगह नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण बनाने और नियमों के अनुरूप काम नहीं करने वाले 250 से अधिक मदरसों को बंद किए जाने का भी उल्लेख किया। धामी ने दावा किया कि कांग्रेस के शासन में मदरसा बोर्ड में केवल एक समुदाय को शामिल किया गया था, जबकि उनकी सरकार ने सभी अल्पसंख्यक समुदायों को व्यवस्था में शामिल करने की पहल की है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को सरकार के प्रमुख निर्णयों में गिनाते हुए कहा कि इससे मुस्लिम महिलाओं को कुछ सामाजिक कुरीतियों से मुक्ति मिलने का रास्ता खुला है। मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव से पहले जारी दृष्टिपत्र में किए गए वादों को पूरा करने की दिशा में सरकार ने कदम उठाए हैं। उनके अनुसार, कांग्रेस ने यूसीसी को लेकर लोगों में भय पैदा करने की कोशिश की थी। धामी ने कांग्रेस पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी सरकार राज्यहित में कानून और व्यवस्थागत बदलाव करती रहेगी। हालांकि, सरकार के दावों और विपक्ष के आरोपों के बीच जनता के लिए महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इन फैसलों का रोजगार, शिक्षा, कानून-व्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन पर क्या असर पड़ा है। गैरसैंण सत्र के समापन के साथ विधानसभा की कार्यवाही भले ही समाप्त हो गई हो, लेकिन मुख्यमंत्री के तीखे बयानों ने राज्य की राजनीति में बहस को नया आधार दिया है। आने वाले समय में सरकार की नीतियों, उनके क्रियान्वयन और विपक्ष की आपत्तियों पर राजनीतिक टकराव जारी रहने के संकेत हैं।