नैनीताल- उच्च न्यायालय ने पथ विक्रेताओं के गैर कानूनी बेदखली पर लगाई रोक

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नैनीताल-उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय पथ विक्रेता महासंघ की जनहित याचिका में राज्य, केंद्र सरकार, पुलिस व नैनीताल नगर पालिका को पथ विक्रेताओं की बेदखली करने की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए उन्हें इस हेतु बनाए गए अधिनियम और नियमावली के हिसाब से कार्य करने के आदेश दिए हैं।

राष्ट्रीय पथ विक्रेता महासंघ नेशनल हॉकर्स फेडरेशन की और से दायर यह जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एस. के. मिश्रा एवं न्याय मूर्ति धानिक की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए ये आदेश दिए।
जनहित याचिका में उत्तराखंड सरकार राज्य व केंद्र सरकार के शहरी विकास विभाग गढ़वाल, कुमाऊं मंडल के आयुक्त जिला अधिकारी नैनीताल, नगरपालिका नैनीताल के साथ उत्तराखंड के पुलिस महानिधिषक को भी पक्षकार बनाया गया है।

नेशनल हॉकर्स फेडरेशन की ओर से पैरवी कर रही उच्च न्यायालय की अधिवक्ता स्निग्धा तिवारी ने बताया कि नेशनल हॉकर्स फेडरेशन देश के पथ विक्रेताओं के 1100 सह संगठनों का महासंघ है जो पिछले बीस वर्षों से उनके अधिकारों के लिए संघर्षरत है।
एडवोकेट स्निग्धा तिवारी ने बताया कि भारतीय संसद ने 1914 में पथ विक्रेताओं के हित में बनाए गए कानून के बावजूद पूरा प्रशासन व नगर पालिका मनमाने व गैर कानूनी रूप से पथ विक्रेताओं का उत्पीड़न कर उनके सामान की अवैध जब्ती करते रहे हैं।
नैनीताल में 23 नवंबर 2021 व 2 और 6 दिसंबर को पुलिस प्रशासन और नगर पालिका ने उनके सामान को अवैध रूप से जब्त कर उन्हें बेदखल करने की कोशिश की थी। जिसको लेकर यह जनहित याचिका दाखिल की गई है। जनहित याचिका में एक्ट व नियमावली के अनुसार सर्वे कर टाउन वेंडिंग कमेटी का विधिवत गठन करने, सामानों की अवैध जब्ती पर रोक लगाने, अवैध रूप से जब्त किए सामानों को वापस करने, प्रति पथ विक्रेता को एक लाख रुपए का मुआवजा देने, जब्त किए गए सामान की सूची न्यायालय में प्रस्तुत करने की भी मांग की गई है।

उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी.तिवारी ने उच्च न्यायालय के इस फैसले का स्वागत किया है।


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